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बतौर PM पहली बार गुजरात में मोदी की रैली, सौनी परियोजना का करेंगे लोकार्पण

राजकोट :

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी मंगलवार को गुजरात में सौनी परियोजना का लोकार्पण कर पहली बार किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी की यह गुजरात कई मायनो में खास है. इसी सभा के जरिये पीएम गुजरात के पटेल आंदोलन के बाद बीजेपी के प्रति बदली परिस्थिति को अपने पक्ष में करने के अलावा 2017 के आगामी विधान सभा चुनाव फतह करने की रणनीति भी बनाएंगे.

गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए 2012 में शुरू की गई सौनी परियोजना के लोकार्पण के लिए बतौर पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार गुजरात जाकर सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे. उसके लिए राजकोट से 38 किलोमीटर दूर सणोसरा गांव के बाहर खास जर्मन तकनीक से बनाया गया है वाटरप्रूफ पांडाल, जहां करीब एक लाख लोगों को जुटाने की तैयारी है. दरअसल राजकोट, जामनगर और मोर्बी, इन तीन जिलों के सीमा संगम स्थल सणोसरा में मोदी जब यहां सभा को संबोधित करेंगे, तो न सिर्फ इन तीन जिलों से, बल्कि सौराष्ट्र के बाकी जिलों के लोग भी यहां मौजूद होगें. मोदी का भाषण सुनने के लिए तीन दर्जन से भी अधिक बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई हैं यहां राज्य सरकार इस कार्यक्रम की तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है.

बता दें कि गुजराती भाषा में सौनी का अर्थ होता है सबकी. सौनी योजना यानी सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना. करीब बारह हजार करोड़ रुपये की इस योजना के तहत सौराष्ट्र के 115 छोटे-बड़े बांधों में नर्मदा का पानी पाइपलाइन के जरिये भरा जाएगा, जिससे सौराष्ट्र इलाके की पानी की समस्या को दूर किया जाएगा. सौराष्ट्र में पहले हर तीन साल में एक बार सूखे की परिस्थिति रहती थी, ऐसे में पानी की समस्या के स्थाई समाधान के लिए बतौर मुख्यमंत्री मोदी ने सौनी परियोजना को वर्ष 2012 में शिलान्यास किया था. सणोसरा गांव के बाहर ही आजी-3 बांध है, जिसके पानी को आजी-4 बांध में बटन दबाकर छोड़ेंगे पीएम मोदी. पहले चरण का लोकार्पण सौराष्ट्र इलाके की पानी की समस्या को दूर करने के लिए किया जाएगा.

बतौर पीएम मोदी इस योजना के पहले चरण का लोकार्पण कर एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश करेंगे. एक तरफ सौराष्ट्र के लोगों की सबसे बड़ी समस्या को दूर करने की दिशा में पहला कदम, तो दूसरी तरफ सियासी तौर पर महत्वपूर्ण सौराष्ट्र में पाटीदार, ओबीसी और दलित आंदोलन की काली छाया से बीजेपी को बाहर निकालने की कोशिश. मोदी की निगाह 2017 चुनावों पर होगी और इसी हिसाब से वो अपनी इस यात्रा को भुनाएंगे. राज्य की बीजेपी सरकार ने सौनी योजना के फायदे गिनाने वाले विज्ञापनों की बाढ़ लगा दी है. इसके जरिये फिर से गुजरात के डेवलपमेंट मॉडल की तरफ ध्यान खींचने की कोशिश की जाएगी जो पिछले एक साल में हुए अलग-अलग आंदोलनों से सियासी तौर पर कुंद हुआ पड़ा है.

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